गुरुवार, जनवरी 13, 2011

एक पर्व, नाम अनेक


संक्रांति संस्कृत का शब्द है, जो सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश बताता है। भारत में मनाए जाने वाले पर्वों में यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जो सौर कैलेंडर पर आधारित है। इसकी वजह से यह पर्व हर साल 14 जनवरी को हर मनाया जाता है। शेष सभी पर्व चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं।


वैज्ञानिक फैक्टर : हिंदू ज्योतिष के अनुसार, कुल बारह राशियां होती हैं। इस प्रकार संक्रांति भी 12 हुईं। लेकिन मकर संक्रांति तब मनाई जाती है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। देश में मनाए जाने वाले अन्य पर्वों की तारीख बदलती रहती है, क्योंकि वह चंद्र कैलेंडर पर आधारित होते हैं आैर चंद्रमा की गति सूर्य की तुलना में अधिक होती है।  दरअसल, पृथ्वी को कर्क आैर मकर रेखाएं काटती हैं। जब सूर्य कर्क रेखा को पार करता है तो पृथ्वी के आबादी वाले हिस्से में उसका प्रकाश कम आता है। इसी दौरान धनु में सूर्य का संचार होने पर सर्दी अधिक हाती है, जबकि मकर में सूर्य का संचार होने पर सर्दी कम होने लगती है। मकर संक्राति से गर्मी तेज होने लगती है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, वाराणसी आैर हरिद्वार में गंगा के घाटों पर तड़के ही श्रद्धालु पहुंच कर स्नान करते हैं। उत्तराखंड में इस पर्व की खास धूम होती है। इस दिन गुड़, आटे आैर घी के पकवान पकाए जाते हैं आैर इनका कुछ हिस्सा पक्षियों के लिए रखा जाता है।


मकर संक्रांति भारत के अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस पर्व को 'तिलगुल" कहा जाता है। महाराष्ट्र में इस पर्व पर घर के लोग सुबह पानी में तिल के कुछ दाने डाल कर नहाते हैं। महिलाएं रंगोली सजाती हैं आैर पूजा की जाती है। पूजा की थाली में तिल जरूर रखा जाता है। इसी थाली से सुहागन महिलाएं एक दूसरे को कुंकुम, हल्दी आैर तिल का टीका लगाती हैं। हल्दी कुंकुम का सिलसिला करीब 15 दिन चलता है।


'सिख मकर संक्रांति को माघी कहते हैं। इस दिन उन 40 सिखों के सम्मान में सिख गुरुद्वारे जाते हैं जिन्होंने दसवें गुरू गोविंद सिंह को शाही सेना के हाथों पकड़े जाने से बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दी थी। इस दिन यहां खीर जरूर बनती है। हिमाचल प्रदेश आैर हरियाणा में भी माघी की धूम होती है।


बिहार में 14 जनवरी को सकरात मनाई जाती है। इस दिन लोग सुबह सवेरे स्नान के बाद पूजा करते हैं। इसके अगले दिन यहां मकरात मनाई जाती है, जिस दिन खिचड़ी का सेवन किया जाता है। बुंदेलखंड आैर मध्यप्रदेश में भी इस पर्व को सकरात कहा जाता है। गुजरात में यह पर्व दो दिन मनाया जाता है। 14 जनवरी को उत्तरायण आैर 15 जनवरी को वासी उत्तरायण। दोनों दिन पतंग उड़ाई जाती है।


मकर संक्रांति को कर्नाटक में सुग्गी कहा जाता है। इस दिन यहां लोग स्नान के बाद संक्रांति देवी की पूजा करते हैं, जिसमें सफेद तिल खास तौर पर चढ़ाए जाते हैं। पूजा के बाद ये तिल लोग एक दूसरे को भेंट करते हैं। केरल के सबरीमाला में मकर संक्र ांति के दिन मकर ज्योति प्रज्ज्वलित कर मकर विलाकू का आयोजन होता है। यह 40 दिन का अनुष्ठान होता है, जिसके समापन पर भगवान अयप्पा की पूजा की जाती है।



उड़ीसा में मकर संक्रांति को मकर चौला आैर पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति कहा जाता है। असम में यह पर्व बीहू कहलाता है। यहां इस दिन महिलाएं आैर पुरुष नए कपड़े पहन कर पूजा करते हैं आैर ईश्वर से धनधान्य से परिपूर्णता का आशीर्वाद मांगते हैं। गोवा में इस दिन वर्षा के लिए इंद्र देवता की पूजा की जाती है ताकि फसल अच्छी हो। आंध्र प्रदेश में भी यह पर्व चार दिन मनाया जाता है। पहले दिन 'भोगी" दूसरे दिन 'पेड्डा पांडुगा" (मकर संक्रांति) तीसरे दिन कनुमा आैर चौथे दिन मुक्कानुमा मनाया जाता है। भोगी के दिन घर का पुराना आैर अनुपयोगी सामान निकाला जाता है आैर शाम को उसे जलाया जाता है


थाई माह की शुरुआत
तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल कहलाता है। इस दिन से तमिलों के थाई माह की शुरुआत होती है। इस दिन तमिल सूर्य की पूजा करते हैं। उनसे अच्छी फसल के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। यह पर्व राज्य में चार दिन मनाया जाता है।

1 टिप्पणी:

  1. bohat hi accha lekh hai..jankari bohat mahatvpurn hai..shabdavali jaise roshni k rang birange bulbo ko ek durey mey piroya hua...mujhe behad pasand aaya..kripya aage bhi apni lekhni k madhyam sey hamara gyan badaye...
    Ratna Rajshri...

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